जिस धरती पर जन्म लिया, उस धरती का तुम मान करो।
जिस भाषा ने ज्ञान दिया, उस भाषा का सम्मान करो॥
जिस धरती पर संस्कृति का, सबसे पहले विकास हुआ।
क्या उस धरती पर ही, उनकी भाषा का है अब ह्रास हुआ॥
जिस भाषा से गाँधी ने था, जन-जन का आह्वान किया।
जिस भाषा को संविधान ने भी था सम्मान दिया॥
उस भाषा के निज गौरव पर, तुम भी अब अभिमान करो
उस भाषा के स्वाभिमान को, वापिस लाने का फिर तुम अब अधिष्ठान करो॥
भारत माँ के चरणों में, हम नित-नित शीश नवायेंगे।
भाषा के खोये गौरव को, हम फिर वापिस लायेंगे॥
जिस भाषा ने आज तक दिया था सबको ज्ञान।
उस भाषा का आज फिर धरना हमको ध्यान॥
जिस पश्चिम के देश ने था हमको भी गुलाम किया।
उस पश्चिम की भाषा पर क्या तुमने है अब आस किया?
जिस भूमि पर सत्य ही सदा रहा सगुण सर्वेश।
उस भाषा का एक ही प्रेम है निर्गुण सन्देश॥
(डेढ़ दशक पहले के भाव) जारी है.........
जय हिंद........
शुक्रवार, 19 मार्च 2010
बुधवार, 17 मार्च 2010
जलती मशाल!
हम जन्मे भी थे अकेले, मरकर जायेंगे भी अकेले।
ज़िन्दगी में ना कुछ अपना लाये थे, ना कुछ अपना हम ले जायेंगे।।
दुनिया में ना कोई अपना है, कुछ भी सोचना बस एक सपना है।
कुछ सोचना बस एक आस है, ज़िन्दगी में सिर्फ प्यास है।
हमने तो सबको ख़ुशी ही दिया, लोगों के आंसू को हमने पिया।
ज़िन्दगी को हमने रो-रो के जिया, फिर हमने कुछ ना किया।।
सुख की चाह में दुःख को झेलते रहे, फिर भी हमें ज़िन्दगी में अपने ना मिले।
अपनों को जो अपना समझते है,
ज़िन्दगी में उन्हें दुःख ही दुःख मिलते हैं।
मन की आँखों से देखो, सब सच्चाई दिख जाएगी।
लेकिन हकीक़त में कुछ नहीं सामने आयेगी॥
अपने के अन्दर का अपना, सिर्फ अपना है।
दूसरों का अपना, सिर्फ एक सपना है॥
पथ के राही बस साथ-साथ चलते हैं,
मंजिल के मिलने पर, फिर नहीं मिलते हैं।
जो दूसरों के कंधे पर सर रखकर सोते हैं,
ज़िन्दगी में वे अपना सब कुछ खो देते हैं।
ज़िन्दगी में दूसरों को, अपना समझने की भूल ना करो,
स्वयं को अपना सहारा बनाने की बस कोशिश करो।
किसी से कुछ पाने की कभी चाह ना करो,
अपनी अन्दर की शक्ति पर केवल अभिमान करो॥
ना तो कोई कभी अपना होता है,
जो तुम चाहते हो, वो कभी नहीं होता है।
अपनी शक्ति की तुलना, अपनी मन की तुला से करो,
ज़िन्दगी में लगे घावों को भूल के क्षमा करो॥
(डेढ़ दशक पहले के भाव) जारी है.........
जय हिंद....
ज़िन्दगी में ना कुछ अपना लाये थे, ना कुछ अपना हम ले जायेंगे।।
दुनिया में ना कोई अपना है, कुछ भी सोचना बस एक सपना है।
कुछ सोचना बस एक आस है, ज़िन्दगी में सिर्फ प्यास है।
हमने तो सबको ख़ुशी ही दिया, लोगों के आंसू को हमने पिया।
ज़िन्दगी को हमने रो-रो के जिया, फिर हमने कुछ ना किया।।
सुख की चाह में दुःख को झेलते रहे, फिर भी हमें ज़िन्दगी में अपने ना मिले।
अपनों को जो अपना समझते है,
ज़िन्दगी में उन्हें दुःख ही दुःख मिलते हैं।
मन की आँखों से देखो, सब सच्चाई दिख जाएगी।
लेकिन हकीक़त में कुछ नहीं सामने आयेगी॥
अपने के अन्दर का अपना, सिर्फ अपना है।
दूसरों का अपना, सिर्फ एक सपना है॥
पथ के राही बस साथ-साथ चलते हैं,
मंजिल के मिलने पर, फिर नहीं मिलते हैं।
जो दूसरों के कंधे पर सर रखकर सोते हैं,
ज़िन्दगी में वे अपना सब कुछ खो देते हैं।
ज़िन्दगी में दूसरों को, अपना समझने की भूल ना करो,
स्वयं को अपना सहारा बनाने की बस कोशिश करो।
किसी से कुछ पाने की कभी चाह ना करो,
अपनी अन्दर की शक्ति पर केवल अभिमान करो॥
ना तो कोई कभी अपना होता है,
जो तुम चाहते हो, वो कभी नहीं होता है।
अपनी शक्ति की तुलना, अपनी मन की तुला से करो,
ज़िन्दगी में लगे घावों को भूल के क्षमा करो॥
(डेढ़ दशक पहले के भाव) जारी है.........
जय हिंद....
सोमवार, 8 मार्च 2010
बुधवार, 27 जनवरी 2010
जय हो बाबा रामदेव!


बाबा रामदेव २७ जनवरी को बनारस में थे। बड़ागांव में एक सभा के बाद चंदौली में दो दिन के योग शिविर के लिए जा रहे थे। भोजूबीर से गुजरना था। आर्य समाज ने उनके स्वागत की तैयारी की थी। हमें भी कहा गया तो हम भी तैयार हो गए। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद तक़रीबन रात ९ बजे बाबा भोजूबीर से गुजरे। हम लोगों ने चौराहे पर रोककर उनका स्वागत किया। जानकारी के मुताबिक बाबा का योग शिविर का कार्यक्रम सफल रहा। सुदूर गाँव में शायद बाबा का ये पहला कार्यक्रम था। लेकिन अब बाबा गाँव में समय देंगे।
बाबा रामदेव का ये अभियान रंग ला रहा है। परिवर्तन शुरू हो गया है, लेकिन सवा सौ करोड़ के इस देश में इसका पूरा असर दिखने में समय लगेगा। बाबा का योग गाँव-गिराव तक पहुँच गया है। अब भारत स्वाभिमान भी गाँव में दस्तक देने लगा है। लोग अभी तक सो रहे थे। अभी जागना शुरू किया है, अंगड़ाई ले रहे हैं। चेतना लौट रही है। कहा जाता है की आदमी सोने के बाद मर जाता है। जगता है तो जिंदा होता है। अब जागा है। जागने के बाद आदमी अलसाया रहता है। आलस जाने में समय लगता है।
आज़ादी की लड़ाई १८५७ में शुरू हुई, आज़ादी १९४७ में मिली। ९० साल लग गए आज़ादी पाने में। तो भारत को भ्रष्टाचार, सांस्कृतिक गुलामी से मुक्ति पाने में कुछ समय तो लगेगा, अगर उसकी अब शुरुआत हो रही है। ..................जय हिंद!
गुरुवार, 21 जनवरी 2010
पत्रकार : अपनी आवाज़ नहीं उठा सकते
पत्रकार दूसरों के हक के लिए लड़ता है, लेकिन उसका हक जब मारा जाता है, तो अपने बात कही नहीं कह पता। उसके साथ मजदूरों जैसा व्यवहार किया जाता है, दिहाड़ी भी टाइम से नहीं मिलती, उसमे भी कभी भी कटौती कर ली जाती है। उस पर कारन पूछ लिया जाय तो नियोक्ता chhutti करने की धमकी देता है। मजदूरों की तो सरकार ने भी मजदूरी तय कर दी है, लेकिन पत्रकारों का कोई वेतन तय नहीं है। जितने में बारगेनिंग हो जाय।
तमाम प्रेस संगठन बने हुए हैं, प्रेस क्लब भी दिल्ली में बना हुआ है, लेकिन लगता है ये केवल शराब का अड्डा बन कर रह गया है, जहाँ शाम को स्वनाम धन्य पत्रकार अपना गम गाफिल करते हैं। पत्रकारिता में शराब और कुछ चीज़ों जिसकी सार्वजनिक चर्चा करना उचित नहीं है, जैसे ज़रूरी हो गई हैं। ये लोग इस पर अपना सर्वाधिकार समझाते हैं, और कुछ पत्रकार तो इसका बड़े गर्व के साथ इसकी विवेचना करते हैं। लोगों के बीच में ये बताते घूमते हैं की फलां पत्रकार ऐसे करता है, वैसे करता है आदि।
भाई गिरावट हर जगह आई है, लेकिन आप के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है इसलिए लोगों की उम्मीदें आपसे बहुत ज्यादा हैं। जारी है.........
तमाम प्रेस संगठन बने हुए हैं, प्रेस क्लब भी दिल्ली में बना हुआ है, लेकिन लगता है ये केवल शराब का अड्डा बन कर रह गया है, जहाँ शाम को स्वनाम धन्य पत्रकार अपना गम गाफिल करते हैं। पत्रकारिता में शराब और कुछ चीज़ों जिसकी सार्वजनिक चर्चा करना उचित नहीं है, जैसे ज़रूरी हो गई हैं। ये लोग इस पर अपना सर्वाधिकार समझाते हैं, और कुछ पत्रकार तो इसका बड़े गर्व के साथ इसकी विवेचना करते हैं। लोगों के बीच में ये बताते घूमते हैं की फलां पत्रकार ऐसे करता है, वैसे करता है आदि।
भाई गिरावट हर जगह आई है, लेकिन आप के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है इसलिए लोगों की उम्मीदें आपसे बहुत ज्यादा हैं। जारी है.........
बुधवार, 20 जनवरी 2010
क्षत्रिय चेतना जागरण रथयात्रा : अलग पूर्वांचल राज्य का प्रयास
बनारस में क्षत्रिय चेतना जागरण रथयात्रा की २० जनवरी २०१० को शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण और मुख्य अतिथि थे क्षत्रिय शिरोमणि कुलभूषण ठाकुर अमर सिंह। प्लेन लेट होने की वजह से दोपहर १२ बजे के कार्यक्रम में शाम ५ बजे पहुंचे। जितने लोग कार्यक्रम में maujood थे, utane hi लोग unke kaphile के sath pahunche। in logon का kam रथयात्रा की saphalata nahi अमर सिंह को apna chehara dikhana और unke zindabad के nare lagana bhar tha। agar kisi bade neta के sath gaye hain to अमर सिंह के sath us neta के zindabad के nare lagayenge. अब पता नहीं इससे क्षत्रिय समाज का कितना कल्याण होगा। खैर जिस मकसद से ये प्रोग्राम हुआ अगर ओ कामयाब हुआ तो समाज का जरूर कल्याण होगा।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर हरिवंश सिंह ने जो कार्य योजना बताई, अगर ओ अमल में आ गई तो समाज के हर वर्ग का कल्याण होगा। उन्होंने विकास के लिए गाँव को केंद्र बिंदु बनाने की बात कही, अगर ऐसा हो जाता है तो गाँव का, किसान का कल्याण हो जायेगा। पूर्वांचल के लोगो को मुंबई, दिल्ली की ठोकरे और लानते नहीं सहनी होगी। गर्व के साथ सभी अपनी जन्मभूमि के साथ जुड़े रहेंगे। हरिवंश सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया की मुंबई के डॉक्टर जौनपुर में आकर इलाज करेंगे। ये अच्छी बात है। उन्होंने कहाँ क्षत्रिय दहेज़ ना ले, घर में वर्किंग (जो नौकरी भी कर सके यानि पढ़ी-लिखी हो) बहू लायें, सामूहिक शादी करे ताकि फालतू खर्च से बचा जा सके। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा की वकालत की। ये बातें सुनने में अच्छी लगती है और हकीकत में बदल जाएँ तो और भी अच्छी लगती है।
अमर सिंह ने भी एक सबसे बढ़िया बात की। उन्होंने कहाँ हम हर गाँव में कंप्यूटर और इंग्लिश के एक्सपर्ट लेकर जायेंगे जो दुसरे टीचर्स को एजुकेट करेंगे। बाबु अमर सिंह देर आयद दुरुस्त आयद। आपने बहू राजनीती कर ली अब समाजनीति करिए तभी आप पूर्वांचल और क्षत्रिय समाज का क़र्ज़ उतर पाएंगे, और समाज का भी भला हो जायेंगा। आपने देखा जब आप मुश्किल में फंसे और इज्जत दाँव पर लगी तो आपका वही सगा भाई अरविन्द सिंह आपके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आपके सम्मान के लिए खड़ा हो गया जो आपसे किन्ही कारणों से दूर हो गया था। अब आप समझ गए होंगे अगर आप क्षत्रिय समाज और पूर्वांचल के साथ होंगे तो ये लोग भी आपका पूरा साथ देंगे।
महासभा के यू पी अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह जो अच्छे प्रशासनिक अधिकारीयों में गिने जाते है, ने समाज को जोड़ने की जो रुपरेखा बताई ओ काफी सफल होगी अगर उसपर अमल होता है तो। उनहोंने परिवार से लेकर गाँव, न्याय पंचायत, ब्लाक, तहसील, जिला स्तर पर क्षत्रियो को मजबूत करने की रुपरेखा बताई। समाज के लिए काफी महत्वपर्ण होंगे।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर हरिवंश सिंह ने जो कार्य योजना बताई, अगर ओ अमल में आ गई तो समाज के हर वर्ग का कल्याण होगा। उन्होंने विकास के लिए गाँव को केंद्र बिंदु बनाने की बात कही, अगर ऐसा हो जाता है तो गाँव का, किसान का कल्याण हो जायेगा। पूर्वांचल के लोगो को मुंबई, दिल्ली की ठोकरे और लानते नहीं सहनी होगी। गर्व के साथ सभी अपनी जन्मभूमि के साथ जुड़े रहेंगे। हरिवंश सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया की मुंबई के डॉक्टर जौनपुर में आकर इलाज करेंगे। ये अच्छी बात है। उन्होंने कहाँ क्षत्रिय दहेज़ ना ले, घर में वर्किंग (जो नौकरी भी कर सके यानि पढ़ी-लिखी हो) बहू लायें, सामूहिक शादी करे ताकि फालतू खर्च से बचा जा सके। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा की वकालत की। ये बातें सुनने में अच्छी लगती है और हकीकत में बदल जाएँ तो और भी अच्छी लगती है।
अमर सिंह ने भी एक सबसे बढ़िया बात की। उन्होंने कहाँ हम हर गाँव में कंप्यूटर और इंग्लिश के एक्सपर्ट लेकर जायेंगे जो दुसरे टीचर्स को एजुकेट करेंगे। बाबु अमर सिंह देर आयद दुरुस्त आयद। आपने बहू राजनीती कर ली अब समाजनीति करिए तभी आप पूर्वांचल और क्षत्रिय समाज का क़र्ज़ उतर पाएंगे, और समाज का भी भला हो जायेंगा। आपने देखा जब आप मुश्किल में फंसे और इज्जत दाँव पर लगी तो आपका वही सगा भाई अरविन्द सिंह आपके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आपके सम्मान के लिए खड़ा हो गया जो आपसे किन्ही कारणों से दूर हो गया था। अब आप समझ गए होंगे अगर आप क्षत्रिय समाज और पूर्वांचल के साथ होंगे तो ये लोग भी आपका पूरा साथ देंगे।
महासभा के यू पी अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह जो अच्छे प्रशासनिक अधिकारीयों में गिने जाते है, ने समाज को जोड़ने की जो रुपरेखा बताई ओ काफी सफल होगी अगर उसपर अमल होता है तो। उनहोंने परिवार से लेकर गाँव, न्याय पंचायत, ब्लाक, तहसील, जिला स्तर पर क्षत्रियो को मजबूत करने की रुपरेखा बताई। समाज के लिए काफी महत्वपर्ण होंगे।
गुरुवार, 5 मार्च 2009
प्रेम
मात्र प्रेम का द्योतक आँचल, पितृ प्रेम का साया।
जीवन उसका सफल हो गया, जिसपर इनकी छाया॥
प्राणी श्रेष्ठ बने वे सारे, जिनका जीवन सागर।
प्यार ही बांटा इस दुनिया में, सबका दुःख अपनाकर॥
प्रेम बड़ा वही होता है, जो सबको आनंदित करता।
सबके दुःख में भागी बनकर, उनके कष्टों को भी हरता॥
आशा जीवन श्रेष्ठ है, जिसमें कुछ हो आश।
प्यास बिना सब व्यर्थ है, जीवन हुआ हताश॥
जय हिंद!
जीवन उसका सफल हो गया, जिसपर इनकी छाया॥
प्राणी श्रेष्ठ बने वे सारे, जिनका जीवन सागर।
प्यार ही बांटा इस दुनिया में, सबका दुःख अपनाकर॥
प्रेम बड़ा वही होता है, जो सबको आनंदित करता।
सबके दुःख में भागी बनकर, उनके कष्टों को भी हरता॥
आशा जीवन श्रेष्ठ है, जिसमें कुछ हो आश।
प्यास बिना सब व्यर्थ है, जीवन हुआ हताश॥
जय हिंद!
सदस्यता लें
संदेश (Atom)